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                                                                                                                                                              हास्य-व्यंग्य


                                                                                                                                                              संदीप मील

भूतपूर्व
       

साधारणतया लोग भूतों से डरते हैं मगर इस देश के  राजनेता,प्रशासक , सैनिक अधिकारी आदि लोगों को भूतों से बहुत प्रेम हैं। वे जब तक  पद पर बने रहते हैं तब तक  बेचारे भूत की कोई  फिक्र  नही करते और पद छोङते ही श्री मान जी अपने पीछे `भूतपूर्व' हो जाते हैं। जैसे- भूतपूर्व प्रद्यानमंत्री, भूतपूर्व मुख्यमंत्री, भूतपूर्व सचिव आदि। इन दिनों तो यह प्रचलन इतना बढ चुका है कि  लोग अपने नाम के  पीछे `भूतपूर्व चोर' भी लगा लेते हैं। जिसका अर्थ बताते हैं कि  वो पहले चोर थे मगर अब आघ्यात्म अपना लिया है। फिर भी उन्हे अपने भूतकाल पर इतना .फक्र  है कि  वो आज भी पहले `भूतपूर्व चोर' लिखते हैं फिर अपना नाम।
          हाल ही में इस देश में एक  आदमी बिमार था यूँ तो हजारों लोग यहाँ मरते है जिनकी कहीं कोई चर्चा नही होती मगर वो भूतपूर्व प्रद्यानमंत्री होने के  नाते रोज समाचार पत्रों की दो बाई दो की जगह घेरे रहता है। मेरा भी  आजकल मन करता है कि  मैं भी `भूतपूर्व' हो जाऊ मगर मुझे भूतों से बहुत डर लगता है इसलिए यह क्रांतिकारी कदम नहीं उठा सकता।
 भूतपूर्व लगाने से आदमी को  उसका भूतकाल हमेशा याद रहता है वैसे सारे मनुष्य लगा सकते है `भूतपूर्व जानवर' ताकि  आदमी को यह अहसास रहे कि  वो कभी जानवर था इसीलिए आज भी जानवरो जैसी हरकते कर देता है। क ल श्री राम सेना वाले भी अपने नाम के पिछे लगाएगे `भूतपूर्व पब कलचर पर हमलाकारी'। मेरे दादा जी के  एक  दोस्त भूतपूर्व मंत्री है। वो कहते है कि  जब हम मंत्री थे तब यह भ्रष्टाचार जैसी चीजों के  लिए कोई जगह नही थी मगर अब क्या करें हम तो भूतपूर्व हो गये। वो बात अलग थी कि  उनके  सरकारी  कार्यकाल के  दौरान उनकी सम्पति मे अभूतपूर्व वृद्धि हुई। आज भी उनके  यहॉं आयकर विभाग का छापा नही पङता है क्योंकि  उनके  पास `भूतपूर्व मंत्री' का कवच है। उनकी गाङी को कोई पुलिस वाला नहीं रोकता क्योंकि  उन्होंने अपनी गाङी की नम्बर प्लेट पर बङे बङे लाल अक्षरो में छपवा रखा था `भूतपूर्व मंत्री'। बेचारे पुलिस वाले डरते है कि  कहीं भूत इनका पीछा छोङ दिया और यह सिर्फ  मंत्री रह गये तो उनके  बत्त्चों को मिड डे मिल पर काम चलाना पङेगा, और यह अपना भूत उनके  पीछे लगाकर उन्हे `भूतपूर्व इन्सपेक्टर' बना देंगे।
 वाह रे ! कुर्सी जब तक  नीचे है तब तक  तो मजा है ही और नीचे से हटते ही लोग भूतपूर्व' लगा कर मजा करेंगे। अगर उपयोगितावाद का यह सिद्धान्त बेचारे जरमी बेंथम को पता होता तो वह छाती पीट पीटकर रोता कि  वो हिन्दुस्तान में क्यों नही जन्मा?
कुछ दिनों पहले राजस्थान के  विधानसभा चुनाव में मैं वहॉं एक  गावॅं में था, उसी दिन एक  विधायक  पद के  उम्मीदवार का भाषण था जो पहले मुख्यमंत्री थे और आजकल `भूतपूर्व मुख्यमंत्री' रह गये है। वे सभा में आये और बोले, `भाइयों और बहनों मुझे बचा लीजिए, मेरी जान आपके  हाथों में है,
मुझे भूत से बहुत डर लगता है। आप इस बार अपना अमूल्य वोट देकर मेरा भूतपूर्व हटा दें ताकि  मैं मुख्यमंत्री रह जाऊ।'

मुझे भी इस भूतपूर्व शब्द से इतनी मोहब्बत हो गई है कि  मैने उठकर पूछा,`श्रीमान जी आपके  भूतपूर्व वादों का  क्या हुआ?'
वे जोश के  साथ बोले,`मैं वादा करता हूँ कि  मेरा भूतपूर्व हटने के  साथ ही मैं वादों का भी भूतपूर्व हटा दूगॉं तब मैं सिर्फ  मुख्यमंत्री रह जाऊगा और भूतपूर्व वादे सिर्फ  वादे।'