" सन्नाटा वसुधा पर छाया, नभ में हमनें कान लगाया, फ़िर भी अगणित कंठो का यह राग नहीं हम सुन पाते हैं कहते हैं तारे गाते हैं "
-हरिवंशराय बच्चन
-धुँध के पार-
लेखनी-नवंबर-2009
(वर्ष-3-अँक-33)
इस अंक में- कविता धरोहरः अज्ञेय। कविता आज और अभीः गिरीश पंकज, शैल अग्रवाल, किशोर काला, तेजराम शर्मा, रामाश्रय सिंह। माह के कविः सुरेश पंडा। गजलः जतिन्दर परवाज़ । बाल कविताः शेरजंग गर्ग ।
परिचर्चाः सुशील कुमार । मंथनः लक्ष्मीमल सिंघवी। परिचयः अनवर सुहैल। कहानी समकालीनः अनवर सुहेल। कहानी धरोहरः निर्मल वर्मा।लघुकथाः डॉ. श्याम सखा श्याम । परिदृश्यः शैल अग्रवाल। रागरंगः सीताराम गुप्ता। गुलदस्ताः डॉ. ओमप्रकाश श्रीनिवास येमुल। हास्य व्यंग्यः संदीप मील। बाल कहानीः शमशेर अहमद खान। चौपालः वेदप्रताप वैदिक और माह की साहित्यिक व सांस्कृतिक खबरों से भरपूर विविधा।
In the English Section:
Autumn: by various artists. Favourite Forever: John Dunn. Poetry Here & Now: Ashok Gupta. Story:James Joyce. Talking Heads:Devi Nagrani. Kids' Corner: Akbar-Birbal story and a poem by Richard Edwards.