" रोज दिन के बस्ते में मां एक नया सूरज रखती है, रोज ही रात हो जाती है।
न बेटा ही उठकर पढ़ता है , न मां आदत बदल पाती है ।। "
-शैल अग्रवाल
लेखनी-सितंबर-2010
वर्ष 4-अँक-43
(शिक्षा विशेषांक )
इस अंक में-
माह के कविः अनवर सुहेल। कविता धरोहरः भवानी प्रसाद मिश्र। कविता आज औऱ अभीः पुरुषोत्तम विश्वकर्मा, रामेश्वर कम्बोज हिमांशु, मंजु मल्लिक मनु। माह विशेषः आर. के. पालीवाल, मधुप मोहता, शैल अग्रवाल, डॉ. महेन्द्र प्रताप पांडे ' नन्द' , रामेश्वर कम्बोज 'हिमांशु' । बाल कविताः सोहनलाल द्विवेदी ।
मंथनः वीरेन्द्र अग्निहोत्री। परिचर्चाः रघुवेन्द्र सिंह। कहानी समकालीनः अशोक गुप्ता । कहानी समकालीनः नीलिमा सिन्हा । लघुकथाः सुकेश साहनी। दृष्टिकोणः- डॉ. शकील अहमद खान । मुद्दाः वेदमित्र । हास्य-व्यंग्यः अजय पराशार। सरोकारः वैद्यनाथ झा। विचारः मोहनदास करमचन्द्र गांधी। चौपालः रामेश्वर कम्बोज हिमांशु । बाल कहानीः शमशेर अहमद खान, रंग-तरंग- युवराज पंड्या। माह की साहित्यिक व अन्य खबरों से भरपूर विविधा।
In the English Section: Inspirational: A.P.J. Abdul Kalam. Favourites Forever: Surdas. Poetry Here & Now:Christine Coleman. Story: Shamoil Ahmad. Kids'Corner: Story-Avnishka. Nursery Rhyme-W.M. Thakeray.